कांग्रेस नेताओं ने अपनाया हिन्दुत्व का एजेंडा, राजनीतिक पहल या कुछ और!

देश की राजनीति में इस समय मोदी लहर चल रही है, लहर का ही असर था कि 2014 के लोकसभा चुनावो में भाजपा ने प्रचंड बहुमत से केन्द्र में सरकार बनाई । उस समय लोगों को लगा कि ये जीत तीर में लगा तुक्का साबित होगी, पर उसके बाद हुए विधानसभा चुनावों सहित अलग अलग जगहों पर हुए उप चुनावों में भाजपा की प्रचंड जीत ने साबित कर दिया कि ये लहर नहीं ये तो आंधी है जिसमें बाकी दल रेत केे महल साबित हो रहे हैं। हालांकि बीच में बिहार और दिल्ली के चुनावों में भाजपा की शिकस्त ने इस आंधी को रोकने का प्रयास किया पर वो इस आंधी को रोकने में नाकाम ही साबित हुए। जिनके बाद आए उप्र के विधानसभा चुनावों के नतीजों ने एक बार फिर से साबित कर दिया कि मोदी नाम की आंधी अब तूफान बन चुकी है जिसके सामने आने वाला हर राजनीतिक किला ताश के पत्तों की तरह बिखर रहा है।
उप्र के नतीजों ने सभी राजनीतिक दलों को सकते में डाल दिया है, दरअसल अब तक जो हिन्दुत्व का एजेंडा भाजपा के लिए कभी कभी मुसीबत बनने लगा था वो आज पार्टी के लिए संजीवनी बन चुका हैं। यहीं बजह है कि कल तक जिस नेता के बयान से पार्टी किनारा करती थी आज वही नेता उप्र में पार्टी का तुरूप का इक्का साबित हुआ । पार्टी ने उसके सिर पर प्रदेश का ताज रख दिया।
उप्र में भाजपा की इस जीत ने अब सभी पार्टीयों में खलबली मचा दी है। उप्र में सपा और कांग्रेस का गठबंधन भी मोदी के तूफान के सामने टिक नहीं पाया, वहीं बसपा का हाथी तो जैसे खिलौनो वाला हाथी साबित हुआ, अब सभी दल एक जुट होकर इस तूफान को रोकने की प्लांनिग कर रहे है जिसकी सुगबुगाहट अभी से आने लगी है, मप्र में आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए अभी से सभी पार्टीयां अपनी अपनी तैयारीयां शुरू कर चुकी है ।
अटेर उप चुनाव ने जहां कांग्रेस को डूबते को तिनके का सहारा दिया है वहीं भाजपा के लिए 15 साल के बाद फिर से सत्ता में काबिज बने रहना एक बडी चुनोती है। म.प्र. में विधानसभा चुनावों के लिए पार्टीयां जहां तैयारीयां शुरू कर चुकी है वहीं नेताओं ने भी अपनी अपनी जमीन टटेालना शुरू कर दिया है, पर हाल ही में कांग्रेस के दो बडे नेताओं के द्वारा दिए गए हिन्दुत्ववादी बयानों ने कई सवाल खडे कर दिए है, कांग्रेस  राष्ट्रीय सचिव सज्जन वर्मा जहां गाय को राष्ट्रीय  पशु घोषित करने की मांग करने के साथ गौ वध रोकने के लिए एक मुहिम शुरू करने का ऐलान कर चुके है वही दूसरी और कांग्रेस के ही एक बडे नेता पीसी शर्मा ने हनुमान जयंति पर अवकाश  घोषित करने की मांग कर डाली। ये दौनों ही नेता मप्र की राजनीति में कांग्रेस का बडा नाम है, पर इन बयानों के बाद अब दो बातों की सुगबुगाहट तेज हुई, जिसमें पहली तो ये कि क्या कांग्रेस भी अब हिन्दुत्ववादी मुददे को भुनाना चाहती है, वहीं दूसरा क्या कहीं ये दौनों ही नेताओं ने भाजपा के सामने आने वाले चुनावों को लेकर कोई संकेत तो नहीं दिया।
पिछले चुनावों को देखा जाए तो भाजपा की चुनावी रणनीति का एक बडा हिस्सा सामने वाली पार्टी के बडे नेताओं को तोडने का रहा है, ऐसे में इन दौनों ही बडे नेताओं के बयान कुछ तो दाल में काला होने का शक पैदा कर रहे है।हालांकि देखना़ तो यही होगा कि अटेर की संजीवनी से कांग्रेस अब वापसी करती है या आने वाले चुनावों में भाजपा फिर से लगभग निर्विरोध जीत हासिल करेगी।
लेखक विजय तिवारी युवा पत्रकार हैं। और ग्वालियर चंबल अंचल की पत्रिकारिता के बाद भोपाल में निजी समाचार चैनल में कार्यरत हैं।
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