‘नमामि देवी  नर्मदे‘‘ सेवा यात्रा,धार्मिक,सामाजिक या फिर राजनेतिक!

मप्र सरकार के द्वारा चलाई जा रही नर्मदा सेवा यात्रा के जरिए आखिरकार किस तरह से नर्मदा स्वच्छ होगी, करोडो रूपए खर्च कर, सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर, मप्र सरकार आखिर क्या साबित करना चाहती है। क्या वाकई बडी फिल्मी हस्तियों को बुलाकर,नर्मदा मैया की आरती उतरवाकर या बडे बडे भजन गायकों के प्रोग्राम कर सच में नर्मदा मैया स्वच्छ हो पाएंगी। आखिर क्या जरूरत है नर्मदा सेवा यात्रा का पूरे देश में प्रचार प्रसार करने की ? क्या जरूरत है देश से बाहर जाने वाले विमान सेवाओं में इस यात्रा का प्रचार प्रसार करने की ? क्या ये सब करने से नर्मदा  स्वच्छ होगी ? इन सभी बातों को देखकर ये आसानी से समझा जा सकता है कि ये यात्रा धार्मिक, सामाजिक पहल है या फिर राजनेतिक।
नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा, देश में या कहे तो दुनिया में किसी भी नदी के लिए अब तक के इतिहास में निकाली गई सबसे बडी यात्रा 3 हजार किमी से अधिक की यात्रा है। नदियों को पुरातन काल से ही पूज्यनीय माना गया है। इसमें कोई दो राय नही कि जिस प्रदूषण की बात आज दुनिया में की जा रही है उसके बारे में भारत में वरषों पहले ही अनुमान लगा लिया गया था और तभी से नदियों को हमारे धर्म ग्रंथो से जोडकर उन्हे पूज्यनीय माना गया। मां नर्मदा मध्य प्रदेश के एक बडे भाग में होकर निकलती है। पर लगातार नदी के अत्यधिक दोहन ने इस  जीवनदायनी नदी के जीवन पर ही संकट खडा कर दिया। अवैध उत्खनन हो, अंधाधुंद फेक्ट्रीयों और कारखानों का रासायनिक पानी हो, शहरों की गंदगी हो या फिर नदी के आसपास के जंगलो की कटाई हो, इन सब ने नदी के अस्तित्व पर ही खतरा पैदा कर दिया।
नर्मदा नदी के हालात को देखते हुए जरूरत थी कि इसका संरक्षण किया जाए, इसे बचाने के लिए व्रक्षारोपण किए जाए, शहरो की गंदगी को नदी में जाने से रोका जाए, अवैध उत्खनन को रोका जाए और जो रासायनिक जहर इसमें मिल रहा है उसके लिए इंतजाम किए जाए। मप्र सरकार ने  4 महीनो की नर्मदा सेवा यात्रा की शुरूवात की, ये यात्रा 3 हजार किमी से अधिक दूरी तय करते हुए नर्मदा को साफ करेगी। 4 महीनों की इस यात्रा में प्रदेश से लेकर केन्द्र के बडे बडे नेता भी शामिल हो रहे है, केन्द्रिय ग्रह मंत्री राजनाथ सिंह हो,उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ हो,या फिर बालीबुड की बडी हस्तियां जिसमें अक्षय कुमार, प्रकाश झा, विवेक आ्बेराय, गोविंदा हो, ये सभी इस यात्रा में शामिल होकर इसे सफल बनाने की अपील कर चुके है।
नर्मदा सेवा यात्रा में बडा सवाल एक जो खडा होता है वो बस यही है, कि अलग अलग शहरों में निकाली जा रही यात्रा आखिर चल कहां रही हैं। हर दूसरे दिन प्रदेष के एक शहर या कस्बे में एक बडा सा कार्यक्रम आयोजित होता है, इस कार्यक्रम के लिए पूरे प्रदेश से कार्यकर्ता बुलाए जाते है, पूरी सरकारी मसीनरी लगा दी जाती है और वहां एक बडी फिल्मी हस्ती के साथ साथ कुछ बडे राजनेता और संत समाज को बुलाकर बार बार नर्मदा मैया को स्वच्छ रखने का और सरकारी योजनाओं से प्रदेश को और उसकी जनता को खुशहाल करने का भाषण सुनाया जाता है।पर जो बीजेपी नेता नर्मदा पर अवैध उत्खनन कर रहे है उन पर कोई बडी कार्यवाही नहीं होती, सीएम भाषण में तो खूब बोलते नजर आते है पर हकीकत ये है कि कोई भी अधिकारी किसी भाजपा नेता के अवैध उत्खनन पर लगाम लगाता है तो उस अधिकारी पर हमला करने से भी खनन माफिया नहीं चुकता और अगर कार्यवाही कर दी तो उस अधिकारी का ट्रांसफर जल्द ही हो जाता है, हाल ही में शिवपुरी और उसके आसपास  के इलाको में हुइ घटनाओ ने इन बातो को साबित कर दिया है।
पहल अच्छी है पर इस पहल पर पानी की तरह से जो पैसा बहाया गया है उसका आधा पैसा भी सरकार ने नदी के संरक्षण पर खर्च किया होता तो सच में नर्मदा सेवा यात्रा एक धार्मिक और सामाजिक पहल बनती और इससे आगे आने वाली पीढियां भी लाभांन्वित होती। पर अभी जो चल रहा है उससे ये तय है कि नर्मदा स्वच्छ हो या ना हो, बीजेपी की आगामी विधानसभा के चुनावों में विरोधी पार्टी को साफ करने की कवायद जरूर शुरू हो गई है। भाजपा ने सरकारी मशीनरी का उपयोग करते हुए अभी से चुनावी बिगुल फूंक दिया है और यही बजह है कि सीएम का एक पैर  नर्मदा यात्रा में रहता है और दूसरा पैर भोपाल में बैठके लेने में निकल रहा है। एक ही दिन में विमान से यात्रा कर प्रदेश एक कोने में नर्मदा सेवा यात्रा में शामिल होते है तो उसी दिन भोपाल में मंत्रीयो का और विधायको का रिपोर्ट कार्ड चेक करते है।
विजय तिवारी भोपाल (मुरैना)
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