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जनमत: कोरोना के बावजूद किसानों की चुनौतियों से शिवराज कैसे जूझ रहे हैं? | bhopal – समाचार हिंदी में


कोरोना परिस्थिति (COVID-19) के बीच शिवराज सिंह चौहान (CM शिवराज सिंह चौहान) सरकार द्वारा गेंहू की प्राप्ति शुरू की गई है। कोन्ग्रेड्रों पर सोशल डिस्टेंसेंसिंग (सामाजिक भेद) कायम रखने का दावा सरकार द्वारा किया जा रहा है। लेकिन कई मंडियों में किसानों के बिना बुलाए पहुंच जाने के कारण व्यवधानों और गड़बड़ा गए हैं। विधानसभा चुनाव में होने वाले 24 विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनावों के कारण शिवराज सिंह चौहान कोरोना हालात के किसानों के बावजूद अपनी प्राथमिकता से अलग नहीं कर पा रहे हैं।

किसानों के मुद्दे पर बदले की स्थिति में दो सरकारें हैं

मध्य प्रदेश की राजनीति में किसान लगातार बड़े मुद्दे बने हुए हैं। मंदसौर में किसानों पर हुई पुलिस फायरिंग को कांग्रेस ने वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ बड़ा मुद्दा बनाया था। इसके साथ ही कांग्रेस ने किसानों के कर्ज माफ करने का वादा भी अपने चुनाव घोषणा पत्र में किया था। चुनाव में इसका लाभ भी कांग्रेस को मिला। पंद्रह साल बाद सरकार बनाने लायक बहुमत के करीब कांग्रेस पहुंची। भारतीय जनता पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था। सत् में आने के बाद कांग्रेस कर्जमुक्ति के अपने वादे को तेजी से पूरा नहीं कर पाई।

कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री रहे कमलनाथ ने राज्य की खराब वित्नीय स्थिति का हवाला देकर कर्जमुक्ति को अलग-अलग चरणों में करने का निर्णय लिया। कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी के वादे के अनुसार दस दिन में किसानों की कर्ज माफी न होने को ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया ने कमलनाथ सरकार के खिलाफ बड़ा मुद्दा भी बनाया। ज्योतिरादित पाठ सिंधिया अब भारतीय जनता पार्टी में हैं। शिवराज सिंह चौहान की पहचान किसान हितैषी मुख्यमंत्री की रही है। यही कारण है कि 3 मई तक के लॉकडाउन के बाब के अनुसार उन्होंने लहुसन की प्रक्रिया शुरू की।

24 विधानसभा उपचुनाव जीत का लक्ष्य

जियोतिरादित पाठ सिंधिया और उनके समर्थक 22 विधायकों की बगावत के कारण शिवराज सिंह चौहान चौथी बार मुख्यमंत्री बने। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के सदसुओं की संख्‍या बढ़ाने की है। वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की संख्‍या 107 है। सदन में स्पष्ट बहुमत के लिए 116 विधायकों की निष्पक्षता होती है। कांग्रेस के 22 विधायकों द्वारा स्वातीफा दिए जाने के कारण कमलनाथ की सरकार अल् -पमत में आ गई थी। संख्याल के लिहाज से भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ा राजनीतिक दल बन गई। इस कारण उसे सरकार बनाने का मौका मिला।

मध्य प्रदेश की राजनीति में किसान लगातार बड़े मुद्दे बने हुए हैं। (फाइल फोटो)

वर्तमान में कांग्रेस के कुल 92 विधायक हैं। अगले छह महीने में कुल 24 प्रतिष्ठानों पर विधानसभा के उपचुनाव हो रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान को अपनी सरकार को स्थिर रखने के लिए कम से कम पंद्रह सीट हर हाल में जीतना होगा। इस जीत में किसानों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है। किसानों से 1925 रुपए क्विंटल की दर से गेंहू खरीदा जा रहा है। कांग्रेसजन की दर को मुद्दा बना रही है। कांग्रेस प्रवृत्त अजय सिंह यादव कहते हैं कि विपक्ष में रहते शिवराज सिंह चौहान 2100 रुपए क्विंटल की मांग करते थे। वह अब पूरी तरह से करना चाहिए।

कर्ज वसूली से नाराज किसान हैं

किसानों को उपज का पैसा कब मिलेगा यह अभी तय नहीं हुआ है। लेकिन, उपज की बिक्री के बाद जो रसीद उनमे दी जा रही है उसमें बैंक के बकाया कर्ज को भी काटा जा रहा है। किसान इस प्रतिबंधों से नाराज हैं। किसान संघ के पूर्व अध्यक्ष सीताराम पाटीदार ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण किसान पहले ही परेशान हैं। अब समर्थन मूल्य पर प्राप्ति के दौरान बैंक द्वारा ऋण वसूली करना ठीक नहीं है। किसानों की घड़ी में सरकार को किसानों की मदद करनी चाहिए। बैंक द्वारा निर्धारित समय सीमा पूर्ण होने से पहले वसूली अनुचित है। किसान संघ खरगोन के जिला प्रचार प्रमुख कमलेश पाटीदार ने बताया कि कांग्रेस सरकार जाने से कर्ज माफी किसानों के जी का जंजाल बन गया। खरगोन जिला सहकारी केंद्रीय बैंक महाप्रबंधक केके रायकवि ने बताया कि ऋण वसूली के लिए सरकार से ही निर्देश मिले थे। सॉफ्टवेयर भी सरकार ने ही तैयार किया है।

अव्यवस्थाओं के बीच चल रही गेहूँ की बरसात

15 अप्रैल से शुरू हुईeateaten में कई तरह की अव्यवस्थाएं सामने आ रही हैं। सरकार ने भोपाल, इंदौर और उज्जैन को छोड़कर शेष जिलों में गेहूं की प्राप्ति शुरू की है। शुरुआत में तो इन केंद्रों पर 5 से 6 किसानों को बुलाया गया, लेकिन अब केंद्रों पर भारी संख्या में किसान पहुंच रहे हैं। इसके कारण कई जगह विवाद की स्थिति बन रही है। कई केंद्रों पर पुलिस की मदद से तुलाई कार्य चल रहा है। खाद्य-नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्ला के अनुसार सभी जिलों को विभाजित -19 के वायरस से बचाव के लिए दिशानिर्देश जारी की गई है। एसएमएस उसी दिन भेजे जाने के कारण कई किसानसेन केंद्र तक पहुंच नहीं पाए थे। इस कारण अब सरकार ने मंगलवार से तीन दिन पहले एसएमएस भेजना शुरू किया है। इससे किसानों को मंडी तक आने वाली तैयारी करने का मौका मिल जाएगा।

गेंहू रखने के लिए खाली नहीं हैहाउस

सरकार ने 65 लाख मिट्रिक टन गेंहू आने का अनुमान लगाया है। फिटिंग की रेगिशनथा भी इसी हिसाब से की जा रही है। लेकिन, जियादा होने से सरकार का यह अनुमान गड़बड़ा भी हो सकता है। समर्थन मूल्य पर चल रही सरकारीकरण में इस बार 100 लाख मिट्रिक टन से बहुत ज्यादा गेहु आने की संभावना प्रकट की जा रही है। किसान कोमनी सच्छाई मालूम है। इस कारण वह अपनी उपज को लटकाएद से लटकता बेचना चाहता है। वे किसान भी मंडी में पहुंच रहे हैं, जिन्दा एसएमएस के जरिए बुलाया नहीं गया है। किसान नेता शिवकुमार कचुका कहते हैं कि किसान दलित हैं। एसएमएस नजर से डिफ़ॉल्टने का डर उसके अंदर की तलाश का भाव पैदा कर रहा है। कोरोना का डर भी किसान के अंदर है।

किसान को किसानड्रगों के मिल रहे एसएमएस

प्राप्ति केंद्रों पर किसानों की भीड़ इकट्ठा न हो और किसानों को गेहूं बिक्री के लिए दूर तक न जाना पड़े, इसके लिए इस साल गत वर्ष की तुलना में डेढ़ हजार अधिक केंद्र केंद्रित बनाए जाने का दावा सरकार ने किया है। इसके बाद भी किसानों को जो एसएमएस मिल रहे हैं, वे 48 किलोमीटर तक की दूरी वाले कानपुरियरों के भी हैं। कोरोना लॉकडाउन में इतनी लंबी दूरी तय करने का साहस किसान नहीं जुटा पा रहा है। जबलपुर जिले की मझौली तहसील के सहजपुराखेतन केंद्र के अंतर्गत लगभग सोलह गांव आते हैं। पूर्व में अंतरपुरासेन केंद्र अन्नपूर्णा खोजहाउस गोसलपुर में संचालित होता था, लेकिन इस वर्ष 48 किलोमीटर दूर बनाया गया है।

कांग्रेस ने किसानों के कर्ज माफ करने का वादा भी किया था। चुनाव में इसका लाभ भी कांग्रेस को मिला। (फाइल फोटो)

दरअसल, सायलो बैग मझौली जाने के लिए खिन्नी से आगे मुरैठ गांव पर हिरन नदी पर बना पुल पिछले पांच साल पहले टूट गया था, जिसके कारण वहां से चारपहिया और बड़े वाहन का आवागमन बंद है। किसानों को सिहोरा से मझौली होते हुए जाना पड़ेगा जो कि बेहद दूर है। भारत कृषक समाज के अध्यक्ष केके अग्रवाल का कहना है कि भोपाल में बैठे अधिकारियों को गांव के पहुंच प्रशिक्षण का अंजाजा नहीं है। नक्षशा देखकर शायद भौगोलिक स्थिति का अंजज लगा रहे हैं। इस कारण किसानों को लंबी दूरी तय कर जाना पड़ रहा है। जबलपुर कलेक्टर भरत यादव ने नस सेंटरों की अधिक दूरी की समस्या को निपटाने के लिए क्षेत्र के एसडीएम को जवाबदेही सौंपी है।

सोशल डिस्टेंसिंग में मुश्किल आ रही है

मध्य प्रदेश देश के उन पांच प्रमुख राजों में जहां कोरोनावायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इंदौर के हालात को काबू में लाने के लिए कानपुर सरकार ने एक विशेष दल यहां भेजा है। इंदौर के आसपास के जिलों में भी संक्रमण फैला है। संक्रमण गांवों में पहुंचने से रोकने के लिए सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। मंडियों को सैनेटाइज किया गया है। अन्य व्यवस्थाओं को भी की गई है। लेकिन एक बना हुआ है। एक मंडी में कम से कम चालीस तो हम्नल ही रहते हैं। किसान जिस ट्रॉली में अनाज भरकर ला रहा है, उसका अंजाजा मंडी में किसी को नहीं होता है।

एक समय में 60 से 70 लोग मंडी में मौजूद रहते हैं। तुलाई केंद्रों पर किसानों की ज्यादा भीड़ होने से ये स्थिति बनी हुई है। हालांकि तुलाई कर रहे मजदूरों सहित अन्य स्टाफ की मेडिकल जांच की जा रही है। नागरिक आपूर्ति निगम सीहोर जिले के जिला प्रबंधक मोहम्मदद सलमान कहते हैं कि जिले में अनाज की तुलाई सुचारू रूप से चल रही है। जिला प्रशासन ने व्यवस्थाएं चाक-चौबंद की हुई हैं। कोशिश है कि सभी किसानों का गेहूं समय पर तुल जाए। वे कहते हैं कि सीहोर जिले में 5 लाख हैं। मिट्रिक टन का लक्ष्य है, जिसे हर हाल में हासिल भी कर लिया जाएगा।

((लेखक के निजी विचार हैं)

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