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जबलपुर में पुलिस के चंगुल से कैसे भागा कोरोना पॉजिटिव कैदी? जानिए पूरी कहानी- जबलपुर से पॉजिटिव कैदी -19 पॉजिटिव कैदी जबलपुर के अस्पताल से फरार हो गया है, तो उसने अपनी कहानी के बारे में बताया। जबलपुर – समाचार हिंदी में


जबलपुर से भागा कोरोनार्ट (अपले कपड़ों में) नरसिंहपुर में पकड़ा गया। (फोटो साभार: एएनआई)

जबलपुर के अस्पताल में भर्ती कोरोना पॉजिटिव कैदी जावेद की फरारी को लेकर जबलपुर पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं। मामले में दो आरक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

जबलपुर। पहले पत्थरबाजी और फिर फरारी! पुलिस के कब्जे से फरार होने वाले कोरोनाचारी कैदी जावेद के भागने की कहानी, सिर्फ आपराधिक करतूत भर नहीं है। बल्कि यह मध्य प्रदेश पुलिस की लापरवाही का भी जीता-जागता नमूना है। इंदौर से आया एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम) आरोपी जावेद कोरोना पोजिटिव था, इसलिए उसे अस्पताल में भारी भरकम सुरक्षा के बीच रखा गया था। लेकिन बीते 19 अप्रैल को जावेद ने इस सुरक्षा कवच को ठेंगा दिखाते हुए पुलिस को चकमा दे दिया। हालांकि एक दिन बाद नरसिंहपुर से उसे पकड़ लिया गया। लेकिन उसकी फरारी जबलपुर पुलिस के ऊपर कई सवाल छोड़ गई।

दरअसल, जावेद जिस चालकी से फरार हुआ और बड़े ही नाटकीय ढंग से पकड़ भी लिया गया, उसके पीछे कोरोनावायरस की वजह से लागू लॉकडाउन एक महत्वपूर्ण कारण है। वास्तव में, अस्पताल से तो वह भाग निकला, लेकिन लॉकडाउन की वजह से पूरे राज्य में नाकाबंदी थी, इसलिए 24 घंटे के भीतर नरसिंहपुर जिले की सीमा पर दबोच लिया गया।

जावेद की जुबानी, फरारी की कहानी

फरार होने के बाद जावेद को भले ही पुलिस ने पकड़ लिया, लेकिन वह पुलिस के चंगुल से कैसे भाग निकला, इसकी जो कहानी खुद जावेद ने बताई, वह हैरान करने वाली है। नरसिंहपुर जिले की सीमा पर पकड़े गए जावेद ने बताया कि अस्पताल में उसकी निगरानी के लिए मौजूद पुलिसवालों की लापरवाही ने इस चाल में उसकी मदद की। उन्होंने बताया कि अस्पताल से निकलने के बाद वह एक ट्रक वाले से लिफ्ट लेकर नरसिंहपुर पहुंच गया। बताया जा रहा है कि अस्पताल के जिस कोरोना वार्ड में जावेद भर्ती था, वहां के एक कैदी ने उसे मोबाइल भी उपलब्ध कराया था।क्या फोन के माध्यम से बना योजना

जावेद जैसे अपराधी को जब पुलिस की निगरानी में कोरोना वार्ड में भर्ती किया गया था, तो उसके पास फोन कहां से आए, इसको लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस की जांच इस दिशा में भी है कि क्या जावेद ने अस्पताल में उपलब्ध फोन से रनिंग की योजना बनाई थी। ऐसे में अस्पताल के कर्मचारी भी पुलिस के कट्टरपंथी आ गए हैं, क्योंकि जिस तरह वह अस्पताल से निकलकर नरसिंहपुर की सीमा तक आसानी से पहुंच गए, वह यूं ही संभव नहीं था।

पुलिसकर्मियों पर उठे सवाल

जावेद की कहानी पर अगर भरोसा करें, तो अस्पताल में उसकी निगरानी के लिए मौजूद पुलिसकर्मियों पर सवाल उठना लाजिमी है। अब जबकि सवाल उठे हैं, तो प्राथमिक जांच में दो आरक्षकों को इसका दोषी माना गया है। इन दोनों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया गया है। इसके अलावा अस्पताल के स्टाफ की भूमिका को भी पुलिस जांचने की बात कह रही है। जबलपुर रेंज के आईजी भगत सिंह चौहान ने इस पूरे मामले की जांच कराने का निर्देश दिया है। इसकी जिम्मेदारी एसपी अमित सिंह को दी गई है।

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प्रथम प्रकाशित: 22 अप्रैल, 2020, 12:57 पूर्वाह्न IST


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