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भोपाल: पिता की कोरोना से मौत हुई तो बेटे ने शव लेने से किया इनकार, तहसीलदार ने किया अंतिम संस्कार- बेटा कोरोना से मौत के कारण पिता का शव लेने से मना करता है। bhopal – समाचार हिंदी में


कोरोना से मौत होने के कारण बेटे ने पिता की लाश लेने से इंकार किया

दरअसल ये एक बेटे की चिट्ठी नहीं बल्कि दस्तावेज में रिश्तों के तार-तार होने का है। इस खत का मजमून सिर्फ इतना है कि बेटा कोरोनाटे पिता के करीब नहीं आना चाहता है। बेटे ने जब अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया तो ऐसे में तहसीलदार गुलाब सिंह ने इंसानियत का फर्ज निभाया

भोपाल। कोरोना का संक्रमण (कोरोना वायरस) जीवन पर ही नहीं, रिश्तों और जूलरी पर भी भारी पड़ रहा है। ये ऐसी बीमारी है जो जीवन के साथ भी और जीवन के बाद भी पीड़ित को अपनों से अलग कर रहा है। मध्य प्रदेश (मध्य प्रदेश) में कोरोना से एक बुज़ुर्ग की मौत हो गयी। संक्रमण की ऐसी दहशत कि बेटे ने पिता का शव लेने से इनकार कर दिया। चिट्ठी लिखकर प्रशासन को सूचना दी कि वह शव लेने में असमर्थ है। ऐसे में तहसीलदार गुलाब सिंह ने बेटे का फर्ज प्लेया और पूरे रीति-रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार किया।

रिश्तों में आए बदलावों का ये वाकया शुजालपुर का है। यहां रहने वाले प्रेम सिंह मेवाड़ा की 20 अप्रैल को कोरोना से संक्रमण के कारण मौत हो गई थी। वो भोपाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे। यहाँ इलाज के दौरान उन्होंने आखिरी सांस ली। मृत्यु के बाद उनका शव परिवारवालों के आने के इंतजार में मॉर्च्यूरी में रख दिया गया। लेकिन बेटों ने टका सा जवाब दे दिया। कहीं पिता के माध्यम से कोरोना का संक्रमण उसे ना हो जाए इस डर के कारण बेटे ने शव लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने प्रशासन के नाम चिट्ठी लिखकर पिता के साथ जुड़ी आखिरी डोर भी तोड़ दी। कहा जाता है कि पिता का क्रिया कर्म प्रशासन ही करेगा।

पुत्र की दो टूकशुजालपुर के कोरोनाशे मृतक प्रेम सिंह के बेटे संदीप ने चिट्ठी में लिखा, मैं अपनी इच्छा से अपने पिता का शव प्रशासन को दे रहा हूं और उनका अंतिम संस्कार भी वह ही करेंगे। संदीप ने पिता का अंतिम संस्कार ना करने का तर्क ये कहा कर दिया कि मुझे पैगी किट पहनना नहीं आता है।

तहसीलदार गुलाब सिंह ने प्लेया इंसानियत का फर्ज़ किया

दरअसल ये एक बेटे की चिट्ठी नहीं बल्कि दस्तावेज में रिश्तों के तार-तार होने का है। इस खत का मजमून सिर्फ इतना है कि बेटा कोरोनाटे पिता के करीब नहीं आना चाहता है। बेटे ने जब अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया तो ऐसे में तहसीलदार गुलाब सिंह ने इंसानियत का फर्ज निभाया। स्वर्गीय मेवाड़ा के शव को हिंदू रीति-रिवाज के साथ शमशान घाट लेकर गए और पूरे विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया।

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प्रथम प्रकाशित: 21 अप्रैल, 2020, 8:44 PM IST


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