बारिश-आंधी में उड़ा रामलला के गर्भ गृह की छत का एक हिस्सा
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बारिश-आंधी में उड़ा रामलला के गर्भ गृह की छत का एक हिस्सा

अयोध्या। कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार के बीच मंगलवार शाम अयोध्या का मौसम बिगड़ गया और यहां बेमौसम बारिश हो गई। यहां तेज आंधी और बौछार के बीच रामलला के वैकल्पिक गर्भ गृह की छत का एक कोना उड़ गया। यह छत प्लास्टिक शीट की थी और इसे नट-बोल्ट की मदद से लगाया गया था। उधर अयोध्या इस बारिश के साथ कई इलाकों में ओले भी पड़े और फसलों को नुकसान भी हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों ने अगले कुछ और दिन तक बारिश की संभावना जताई है।

फिलहाल बता दें कि इसी 25 मार्च को रामलला अपने मूल गर्भ गृह से वैकल्पिक गर्भ गृह में लाए गए थे। स्थानांतरण से कुछ दिन पहले ही रामलला का वैकल्पिक गर्भ गृह तैयार किया गया था। इस गर्भ गृह को लेकर मजबूती के दावे और युद्धस्तर पर किए गए प्रयास का दावा किया गया था। प्रबंधन का कहना है कि गर्भ गृह बुलेट प्रूफ है और इसे आतंकी हमले की दृष्टि से बेहद मजबूत बनाया गया है। बारिश के कारण इस गर्भ गृह पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है और वो पूरी तरह सुरक्षित है। प्रबंधन ने बताया कि आंधी में उड़ी प्लास्टिक शीट 432 वर्ग फीट में बने बुलेट प्रूफ स्ट्रक्चर को बंदरों के मल-मूत्र आदि से बचाने के लिए निर्मित लोहे के ढांचे के ऊपर लगाई गई थी। तेज बारिश के कारण ये शीट ही उड़ गई।

जिलाधिकारी एवं राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी अनुज कुमार झा के अनुसार बुलेट प्रूफ गर्भ गृह पूरी तरह से सुरक्षित है। जिस ढांचे के ऊपर की प्लास्टिक शीट उड़ी है, उससे बुलेट प्रूफ गर्भगृह को बंदरों से बचाने के लिए कवर किया गया था। उन्होंने बताया कि जल्द ही इसे ठीक करा लिया जाएगा।

रामजन्मभूमि में विराजमान रामलला के भव्य मंदिर निर्माण के लिए रामलला को गर्भगृह से सटे परिसर में नए भवन का निर्माण कराकर 25 मार्च को प्रतिष्ठित किया गया है। इस स्थान से निर्माण शुरू करने की तैयारी रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने की थी। लेकिन लॉकडाउन के कारण फिलहाल सारे कार्यक्रम टल गए गए हैं। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि मंदिर निर्माण कार्य आरम्भ करने को लेकर देशभर के विशिष्ट संतों से परामर्श किया गया है। लेकिन कोरोना वायरस के कारण मौजूदा स्थिति को देखते हुए फिलहाल सभी ने निर्माण रोकने पर सहमति दी है। उन्होंने ये भी बताया कि मौजूदा परिस्थितियों के सामान्य होने के बाद ही भूमि पूजन किया जाएगा। साथ ही नए सिरे से अनुष्ठान भी किया जाएगा।

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