Crime

Chhattisgarh News Lets take you to Naglok show the world of snakes

Updated: | Wed, 22 Apr 2020 08:44 PM (IST)

रविंद्र थवाईत, जशपुरनगर। Chhattisgarh News : लॉकडाउन के सन्नाटे के बीच आइए आपको दिखाते हैं नागलोक के विषधरों का संसार। छत्तीसगढ़ के जशपुरनगर जिले की फरसाबहार तहसील में एक स्थान है, कोतेबीरा धाम। लोगों की आस्था है कि यहां की गुफा ही नागलोक का द्वार है। दुर्लभ प्रजाति के विषधर वाले इस इलाके में सर्वाधिक मौतें सांपों के डसने से ही होती है। यहां दुर्लभ छिपकलियां भी पाई जाती हैं। तपकरा से पांच किलोमीटर की दूरी पर प्रसिद्ध शिवधाम कोतेबीरा है।

यहां स्थित गुफा के संबंध में मान्यता है कि यह नागलोक का प्रवेश द्वार है। जनस्रुति है कि प्राचीन समय में यहां देवदूत रहा करते थे। लालचवश कुछ लोगों ने देवदूतों से उनके सोने-चांदी के बर्तन छीनने का प्रयास किया। तब वे सर्प रूप धारण कर पाताल लोक चले गए। इस शिवधाम में महाशिवरात्रि के अवसर पर हर साल श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। शिव मंदिर के पुजारी बचन राम ने बताया कि भगवान दर्शन के लिए नाग अब भी मंदिर में आते हैं। महाशिवरात्रि के अलावा अक्सर सोमवार के दिन मंदिर में सांपों को देखा जा सकता है। ये कुछ देर तक शिव लिंग से लिपटने के बाद वापस चले जाते हैं।

कई दुर्लभ प्रजाति के भी हैं सांप

इस क्षेत्र में किंग कोबरा, करैत जैसे विषधरों की बहुतायत है। वहीं, विचित्र प्रजाति का सांप ग्रीन पीट वाइपर और सरीसृृप प्रजाति के जीव – ग्रीन कैमेलियन, सतपुड़ा लेपर्ड लिजर्ड भी पाए जाते हैं। ग्रीन पिट वाइपर का वैज्ञानिक नाम ट्रिमरसेरसस सलजार है, जो छत्तीसगढ़ के अलावा सिर्फ अरुणाचल प्रदेश में ही पाया जाता है। इसका विष कोबरा की अपेक्षा धीमा असर करता है। इस सांप का उल्लेख हॉलीवुड हैरी पॉटर श्रृंखला की फिल्मों में किया गया है।

भुरभुरी मिट्टी व आर्द्र जलवायु भा रही

सांपों के जानकार कैसर हुसैन ने बताया कि क्षेत्र की भुरभुरी मिट्टी और आर्द्र जलवायु सांपों के प्रजनन और भोजन के लिए आदर्श भौगोलिक स्थिति है। यही वजह है कि यह नागलोक के रूप में ख्याति प्राप्त कर रहा है।

17 वर्षों में 862 लोगों की मौत

सर्पदंश से जिले में 17 सालों में 862 लोगों की मौत सर्पदंश की वजह से हुई है। पिछले वर्ष ही सर्पदंश से 58 लोगों की जान चली गई थी। सर्पदंश से अधिकांश मौतें पीड़ित को समय पर मेडिकल सहायता न मिलने की वजह से होती हैं। जागरूकता की कमी से लोग सर्पदंश पीड़ित को अस्पताल ले जाने के बजाय झांड़-फूंक और जड़ी बूटी से इलाज भी कराते हैं। इससे जहर शरीर में फैल जाता है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

 



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *