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Korba News: दान में मिली 50 हजार किताबों की सबसे बड़ी लाइब्रेरी

Publish Date: | Thu, 23 Apr 2020 04:19 AM (IST)

कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)।

जरूरतमंद विद्यार्थियों को पढ़ाई में मदद करने युवा इंजीनियर प्रशांत महतो ने एक पहल की थी। गांव-गांव व अनेक शहरों में कलेक्शन सेंटर शुरू कर किताबों का दान लिया गया। सैकड़ों लोगों से दान में मिली उन्हीं किताबों का विशाल संग्रह अब कोरबा की सबसे बड़ी लाइब्रेरी का रूप ले चुका है। स्वयं सेवी संस्था चरामेति के बैनर तले करीब 50 हजार किताबों से सुसज्जित लाइब्रेरी से अब स्लम बस्तियों व ग्रामीण क्षेत्र के उन बच्चों तक मदद पहुंचा रहा, जो पढ़ना तो चाहते हैं, लेकिन परिवार की आर्थिक मुश्किलों के चलते वे महंगी किताबों का खर्च उठाने सक्षम नहीं।

जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा, निर्धन परिवारों की मदद व पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रही संस्था चरामेति ने जिले की सबसे बड़ी लाइब्रेरी दीपका में संचालित है, जिसमें करीब 50 हजार पुस्तकों का संग्रह है। खास बात यह है कि इस लाइब्रेरी की किताबों को जनसहयोग से जुटाया गया है। इन पुस्तकों को स्लम बस्तियों व ग्रामीण क्षेत्र के उन विद्यार्थियों तक पहुंचाया जाता है, जो परिवार की आर्थिक मुश्किलों के चलते महंगी किताबों का खर्च उठाने सक्षम नहीं। लाइब्रेरी के अलावा संस्था के सदस्य समय-समय पर चरामेती पाठशाला के जरिए निःशुल्क कोचिंग भी उपलब्ध कराते हैं। संस्था के सदस्य देशभर में जुड़े हुए हैं, जिनकी मदद से छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के अलावा दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश देश के अनेक राज्यों में जरूरतमंद बच्चों को किताबों की मदद पहुंचाई जा रही। वर्तमान में जेईई व एआई ट्रिपल की तैयारी कर रहे जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए अंग्रेजी माध्यम की किताबें उपलब्ध हैं, जिसे प्राप्त करने वे संस्था के वालेंटियर्स से संपर्क कर सकते हैं।

-हजार रुपए की इंजीनियरिंग की बुक में भेल

प्रशांत ने बताया कि 18 मार्च 2015 को पचपेढ़ी नाका रायपुर में एक भेल की दुकान में भेल वाले ने हजार पेज की एक किताब के लास्ट पन्ने से भेल बनाकर दिया। स्ट्रक्चर एनालिसिस विषय पर लिखी गई एस रामामूर्थम की वह किताब सिविल इंजीनियरिंग छात्र पढ़ते हैं। तब उसकी कीमत करीब 800 की थी, आज वह 1200 रुपए है। सोशल साइट पर अनुभव पोस्ट किया तो एक करोड़ से ज्यादा ने पोस्ट शेयर किया था। वे प्रेरित हुए और तभी से यह मुहिम भी शुरू की। लोगों से पुराने पाठ्यपुस्तकों का कलेक्शन कर उन्हें बांट दिया जाता है, जिन्हें किताबों की जरूरत तो है, पर आर्थिक मुश्किलों के चलते खरीद नहीं सकते।

-छह साल में छग के 27 जिले में कलेक्शन सेंटर

यह मुहिम पिछले छह साल से जारी है, जिसे हर साल एक हजार से ज्यादा दानदाताओं का योगदान मिलता है। वर्तमान में उनके और उनकी टीम के सदस्यों ने केवल कोरबा में ही 50 हजार से ज्यादा का कलेक्शन कर रखा है। चरामेती से 1500 से ज्यादा वालंटियर जुड़े हैं और हर साल उनकी टीम ने शासकीय स्कूलों के हजारों बच्चों को किताबें उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ के 27 जिले में एक-एक कलेक्शन सेंटर संचालित कर रखा है, जहां किताबें दान करने के साथ जरूरतमंद बच्चे आकर अपने जरूरत की किताब ले जाते हैं।

-जन्मदिन, शादी-ब्याह में किताबों का उपहार

इंजीनियरिंग की किताब से लिए गए पन्ने पर भेल बेचने के अनुभव के बाद लाइब्रेरी शुरू करने का आइडिया जब प्रशांत ने सोशल नेटवर्किंग साइट पर साझा किया, तो उनके पोस्ट एक करोड़ से ज्यादा ने शेयर किए। इससे प्रेरित होकर उन्होंने यह मुहिम शुरू की। इतना ही नहीं, संस्था के सदस्यों ने एक अनोखी परंपरा शुरू की है, जिसमें शादी-ब्याह व जन्मदिन व अन्य कार्यक्रमों में मेहमानों से अपने लिए किसी महंगे और आकर्षक गिफ्ट की बजाय अपने साथ पुरानी किताबें लाने का आग्रह किया जाता है। ताकि स्कूल-कॉलेज के जरूरतमंद छात्र-छात्राओं के लिए मदद जुटाई जा सके।

Posted By: Nai Dunia News Network

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