कोटा से रायपुर तक एक प्लेट भजिए में ही काटे 40 घंटे,  नहीं मिला खाना
chhattisgarh

कोटा से रायपुर तक एक प्लेट भजिए में ही काटे 40 घंटे, नहीं मिला खाना

कोरबा। राजस्थान के कोटा में पढ़ रहे बच्चों को राज्य शासन ने वहां से छत्तीसगढ़ लाने बस तो भेज दिया, पर सफर में भोजन के इंतजाम नदारद रहे। बच्चों ने बताया कि पहले तो कोटा से उनके बस की रवानगी में देरी की गई। फिर वहां से रायपुर के बीच 40 घंटे से अधिक का सफर सिर्फ एक प्लेट भजिए में ही निपटा दिया गया, जिसके लिए उन्होंने पैसे भी अपनी जेब से दिए थे। इस बीच दो बार लंच व एक बार डिनर का वक्त गुजरा पर भूख-प्यास से बेहाल बच्चों को कोटा से निकलने के बाद से लेकर रायपुर पहुंचने तक एक बार भी भोजन नहीं कराया गया।

कोटा से रायपुर लौटे कोरबा के कुछ बच्चों ने मोबाइल फोन पर ‘नईदुनिया’ से अपने सफर की मुश्किलें साझा की। प्रदेश के अन्य जिलों के बच्चों के साथ एक बस में सवार होकर लौटे इन बच्चों ने बताया कि 26 अप्रैल की रात करीब साढ़े नौ बजे उनकी बस कोटा से रवाना हुई थी।

इसके बाद लगातार बस रात भर दौड़ती रही और अगले दिन एक स्थान पर नाश्ते की व्यवस्था की गई थी। नाश्ते में पकौड़ा-भजिया व कुछ अन्य स्नैक्स रखे गए थे, जिन्हें बच्चों ने अपने पैसे देकर खरीदे। कोटा से निकलते वक्त रात हो चुकी थी, जिसके लिए डिनर के पैकेट उन्होंने वहीं से रख लिए थे। रात के भोजन के लिए बनाए गए इन डिनर पैकेट का इंतजाम भी उस इंस्टीट्यूट की ओर से ही किया गया था, जहां वे कोचिंग कर रहे थे। इस तरह उनकी कोचिंग संस्था ने वहां रहते भोजन का जो इंतजाम किया था, उसके बाद से लेकर मंगलवार को रायपुर पहुंचने के बाद भी कोई व्यवस्था शासन-प्रशासन की ओर से नहीं की गई थी।

वे कोटा से मंगलवार को दोपहर करीब डेढ़ से दो बजे के बीच रायपुर पहुंचे और इस बीच 40 घंटे के सफर में उनके लिए बस एक बार नाश्ते का इंतजाम उन्हीं के पैसों से किया गया, जिसके बाद रास्तेभर बच्चे भूखे रहने मजबूर हुए।

दवाओं पर ऑपरेशन से गुजरा एक छात्र

मेडिकल के क्षेत्र में कॅरियर बनाने कोटा में तैयारी करने वाले एक छात्र ने बताया कि हाल ही में उसका ऑपरेशन भी हुआ था। अस्थमा से पीड़ित होने के कारण यह छात्र वर्तमान में दवाइयों पर है और इसके लिए उसका नाश्ता, लंच व डिनर नियमित होना चाहिए, ताकि वह समय पर अपनी दवाई ले सके। उसकी तरह कई ऐसे छात्र रहे होंगे, जिनके लिए इस तरह नियमित दवाएं लेना जरूरी होगा। इन सब बातों से बेपरवाह होते हुए बच्चों का सफर इस तरह मुश्किल बनाया गया, जो उचित नहीं है।

आने के बाद भी बस में बैठे रहे तीन घंटे

छात्रों ने बताया कि वे मंगलवार को करीब डेढ़ से दो बजे के बीच रायपुर पहुंच गए थे। इसके बाद किसी हॉस्टल के सामने बस रोकी गई और शाम साढ़े चार बजे तक वे वहीं बस में ही बैठे रह गए, पर यहां उनके लिए व्यवस्था समय पर नहीं हो पाने के कारण उन्हें रायपुर आने के बाद भी परेशान होना पड़ा। 40 घंटे से भी ज्यादा समय का सफर कर आए बच्चों के लिए फ्रेश होने तक का इंतजाम नहीं किया गया था। सवाल यह है कि जब बच्चों के लौटने की जानकारी पहले से थी, तो वक्त रहते इंतजाम क्यों नहीं किया जा सका?

रात के अंधेरे में बे्रकडाउन हो गई थी बस

कुछ विद्यार्थियों ने यह भी बताया कि उनकी बस की हालत भी ठीक नहीं थी। कोटा से निकलने के बाद जहां उन्हें भोजन को लेकर समस्या महसूस हुई, वहीं सोमवार की रात उनकी बस भी एक स्थान पर ब्रेकडाउन हो गई। बीती रात करीब नौ बजे उनकी बस खराब हो गई और घुप अंधेरे में उनकी बस बीच रास्ते खड़ी हो गई। इसके बाद घंटों की मशक्कत के बाद कहीं जाकर बस की मरम्मत की जा सकी और उसके बाद वे आगे के लिए वहां से रवाना हुए। ऐसे लंबे सफर पर गए वाहन के लिए फिटनेस एक महत्वपूर्ण बात है।

तीन बार बदला गया क्वारंटाइन सेंटर

रास्ते की मुश्किलें मौके पर सुधारना शासन-प्रशासन के हाथ से बाहर था, पर यहां की अव्यवस्थाओं में जिस तरह बच्चे परेशान हुए, उसके लिए किसे जवाबदार ठहराया जाए, यह बताने वाला कोई नहीं। कोटा से लौट रहे बच्चों के रास्ते में होने की बात जानते हुए भी वक्त पर उनके लिए हॉस्टल का इंतजाम करना तो दूर, उन्हें किस शहर में रखना है, ये फैसला भी नहीं कर सके थे।

यही वजह है जो कोरबा के बच्चों को पहले छुरी स्थित एकलव्य विद्यालय में रखने का निर्णय लिया गया। उसके कुछ देर बाद उन्हें बिलासपुर में रखने और अंत में रायपुर में रखे जाने का निर्णय लिया गया, जिससे वक्त रहते क्वारंटाइन सेंटर की व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं की जा सकीं।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *