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Lockdown in Chhattisgarh – Industry gets locked down forest is getting employment

Publish Date: | Wed, 22 Apr 2020 09:03 AM (IST)

जशपुरनगर। Lockdown in Chhattisgarh : कोरोना संक्रमण के दौर से गुजर रहे जिले में इस वक्त देश व्यापी लॉकडाउन ने बड़े उद्योग और व्यवसाय से लेकर गली मुहल्लों के दुकानों तक में ताला लटका दिया है। सैकड़ों लोगों की नौकरी और व्यवसाय पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। ऐसे में जंगल, लोगों के लिए इस महासंकट की घड़ी में संकटमोचन बन गया है। विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत वन विभाग लोगों को रोजगार और आय का साधन उपलब्ध करा रहा है। शारीरिक दूरी और मास्क के उपयोग का खास ध्यान रखते हुए इन दिनों जंगल में लोग रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। परिवार के भरण पोषण का इंतजाम कर रहे हैं।

डीएफओ एसके जाधव ने बताया कि लॉक डाउन के दौरान वन्य क्षेत्र की सुरक्षा और वन्य जीवों की देखभाल के लिए केन्द्र सरकार ने वन सेवा को आवश्यक सेवा की श्रेणी में शामिल कर लिया है। सरकार के इस कदम के बाद वन विभाग ने तेजी से अपनी गतिविधियां बढ़ाई है।

उन्होनें बताया कि इस वक्त जिले में वन विभाग की सबसे बड़ी चुनौती जंगल को आग से बचाना है। इसके लिए अग्नि सुरक्षा योजना के तहत तेजी से कार्य किया जा रहा है। इस योजना के तहत जिले के सभी 131 बीट में फायर वॉचर की नियुक्ति की जा चुकी है। इससे युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।

जंगल में बूटा कटाई का काम भी बारिश शुरू होने से पहले प्रारंभ कर दिया गया है। इससे पंचायत स्तर पर ग्रामीणों को उनके गांव में ही रोजगार मिल रहा है। वनधन योजना के तहत जिले में महुआ,इमली,चिरौंजी,लाख,हर्रा,बेहरा जैसे वनोपज का संग्रहण और खरीदी की जा रही है। खरीदी के बाद हितग्राहियों को राशि का भुगतान तत्काल किया जा रहा है ताकि लॉक डाउन के दौरान वे अपने दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति सहजता से पूरी कर सके।

तेंदूपत्ता तोड़ाई का काम भी शुरू कर दिया गया है। शरीरिक दूरी का पालन कराते हुए हितग्राही इस काम में जुटे हुए हैं। सरकार की नीति के मुताबिक हितग्राहियों को इस योजना का लाभ दिया जा रहा है। डीएफओ जाधव ने बताया कि लॉक डाउन शुरू होने के बाद वन्य क्षेत्रों में नरवा योजना के तहत तेजी से काम किया जा रहा है। इसके तहत जल स्त्रोतों को सहेजने के लिए निर्माण कार्य किया जा रहा है।

इस योजना के लिए महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के फंड के माध्यम से ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 24 मार्च को देश व्यापी लॉक डाउन घोषित होने के बाद से अब तक वन विभाग 40 हजार 965 मानव दिवस रोजगार का सृजन किया जा चुका है।

बेरहमी से उजाड़ हो रहें हैं जंगल

वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 898 स्कवायर किलोमीटर है। यहां के जंगल में साल और सागौन के वृक्षों की बहुलता पाई जाती है। साल के पेड़ों की स्थानीय उरांव जनजाति की संस्कृति और धर्म में विशेष महत्व है। सघन वनों की बदौलत ही जिले को छत्तीसगढ़ का शिमला का तमगा मिला हुआ है। लेकिन इन दिनों यहां की हरियाली को अपनों से ही खतरे का सामना करना पड़ रहा है।

बेतहाशा अवैध कटाई और आगजनी से जंगल तेजी से उजाड़ होते जा रहे हैं। वन्य क्षेत्रों में अवैध तरीके कब्जा किए जमीनों पर काबिज लोगों को पट्टा दिए जाने के सरकारी नीति,वनों के अस्तित्व को गंभीर संकट में डाल रहे हैं। उद्योगविहिन जिले में सोना,हीरा और बाक्साइट उत्खनन का विरोध जल,जंगल और जमीन पर अधिकार जताते हुए स्थानीय रहवासी लंबे अर्से से कर रहे हैं।

लेकिन यहां के जंगल को उद्योगों से अधिक,अपनों की बेहरमी से खतरा उत्पन्न हो रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वन विभाग एक माह के छोटे से अंतराल में अवैध कटाई के विरूद्व कार्रवाई करते हुए 1 सौ 75 कुल्हाड़ी जब्त कर चुकी है और जिले में भर में पखवाड़े भर में ही 50 से अधिक आगजनी की सूचना पर कार्रवाई की गई है।

Posted By: Anandram Sahu

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