शरणार्थी शिविर में रहने वाले तिब्बतियों ने इंदौर को भेजी मदद
Madhya Pradesh

शरणार्थी शिविर में रहने वाले तिब्बतियों ने इंदौर को भेजी मदद

इंदौरइंदौर। इंदौर में इंदौर आकर गरम कपड़े बेचने वाले तिब्बती रिफ्यूजियों के सामने भले ही इस समय रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया हो, लेकिन उनका दिल बड़ा है। साल में 4 महीने कमाने वाले इन परिवारों ने देश के अलगअलग हिस्सों से इंदौर के कोरोना पीड़ितों के लिए अपनी छोटी सी कमाई में से मदद भेजी है। इसके पीछे अहसास यही है कि जो शहर हमें रोटी देता है, संकट के समय उसकी मदद की जाएगी।

लहासा तिब्बतन रिफ्यूजी विंटर मार्केट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट तेजीन संगपू बताते हैं कि हर साल ठंड में तिब्बती रिफ्यूजी इंदौर आते हैं। चार महिने की कमाई से ही इनकी साल भर की रोजी रोटी चलती है। इंदौर के लोग हमसे गर्म कपड़े खरीदते हैं और इसी से हमारा पेट भी पलता हैं। लेकिन आज कोरोना के कारण इंदौर के लोग परेशानी में हैं। ऐसे में हमारा भी धर्म है कि हम से जो बन गए उनके लिए करें।आज कोरोनावायरस से यहां के लोग जूझ रहे हैं, हमने ये खबर सुनी तो डर गए कि सफाई में नंबर वन रहने वाले शहर को आखिर किसकी नजर लग गई है। हमारी बहुत ज्यादा हैसिटी तो नहीं है। फिर भी जैसा बना, हम कोरोना से लड़ने के लिए यहां के प्रशासन और लोगों की मदद करना चाहते हैं

इंदौर के हरदीप सिंह मेक के जरिए भेजी मदद

तेजीन संगपू ने इंदौर में रहने वाले अपने शुभचिंतक हरदीप सिंह मेक को फोन लगाया और शहर के हाल के FAQ। फिर बताया कि कोरोना से जंग लड़ने में उनका संगठन प्रशासन की मदद करना चाहता है। सभी सदस्यों ने मिलकर जो धनराशि इक्ट्ठा की है उसे प्रशासन तक पहुंचाना चाहते हैं। उसके बाद धनराशि को उनके खाने में ट्रांसफर कर दिया गया। जिसे चेक के रूप में हरदीप सिंह ने इंदौर एडीएम को सौंप दिया।रिफ्यूजी कैंप में रहता है तिब्बती लोग

इंदौर के फुटपाथ पर कपड़ों की दुकान लगाने आने वाले रिफ्यूजी विंटर मार्केट के सभी सदस्य ठंड में हर साल 4 महीने इंदौर में ही बिताते हैं। ठंड की शुरुआत में लगभग 55 परिवार यहां आकर कपड़ों का कारोबार चलाते हैं। बाकी समय ये सभी देश के अलग-अलग कोनों में सरकारी रिफ्यूजी कैंप में रहते हैं। इंदौर में गंजी कंपाउंड और विजय नगर चौराहे के पास ये अपनी लेनें लगाते हैं। जब आपने इंदौर के हालात की जानकारी शुरू की तो देश के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे इन लोगों ने आपस में बात करके मदद का मन बनाया ।54 परिवारों ने 1-1 हजार रुपये इकट्ठा किए और ये राशि इंदौर भिजवा दी।

बड़े जिंदा दिल इंदौर के लोग हैं

तेजीन संगपू कहते हैं कि इंदौर के लोग बड़े जिंदा दिल हैं। वे हमेशा दूसरों की मदद के लिए तत्पर रहते हैं। कई लोग कड़कड़ाती सर्दी के दौरान सड़क किनारे ठिठुरते खानाबदोश लोगों को कंबल, स्वेटर, जैकेट बांटते हैं, वृद्ध आश्रमों में भी बेसहारा बुजुर्गों को मुफ्त में कपड़े देते हैं। हम लोगों का मन व्यथित है क्योंकि ऐसे लोगों को हम परेशानी में नहीं देखना चाहते हैं। इसलिए थोडी सी ही सही लेकिन हम लोगों ने भी संकट की इस घडी़ में मदद करने की कोशिश की है।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *